खास यू होता,हर शाम साथ तू होता :-))

जिंदगी का सबसे मुश्किल वक़्त हम अकेले अनजानी सी राहों पर
ना मंजिल का पता ना राहों की खबर :-))
अजनबी शहर में अकेले तन्हा ,बेवजह वक़्त की फिक्र
अपनों से दूर रहने का गम :-((
एक अनजान सा शहर अनजाने से लोग
बेशक वक़्त के साथ-साथ वहाँ के लोगों के चेहरे भी थोड़े
जाने-पहचाने से लगने लग ही जाते हैं :-))
तंग गलियाँ बेपनाह भीड़
जिसमे दूर-दूर तक ना कोई अपना नजर आये
“तब दिल कह उठता है खास –
इस भीड़ में कोई अपना भी होता 
गर पर लड़खड़ाते तो उसकी बाँहें थाम लेते :-))”
इस भीड़ से दूर जाने के लिये थोड़ा उसके साथ ठहरते 
किसी की आँखों में खोने के लिये 
थोड़ा जिंदगी की खुशियों का गणित मिलाते ;-))



कभी अकेले बैठकर सोचती हू खास कोई ऐसा अपना होता 
जिसके साथ कुछ देर बैठते ,बिना कहे वो सब-कुछ सून लेता 
जिसके साथ हम अपने दिल में दबे सारे राज खोल देते 

जिसके महज होने भर से अपनी दुनिया बदल जाती :-))
“आई मीन कभी-कभार भावनाओं को शब्द देना मुश्किल हो जाता हैं :-))”
ऊफ्फ आज फिर से वो बात याद आ गयी तुम्हें भी याद हैं ना ?????
कि –
शब्दों में क्या रखा हैं ,भावनाओं को समझो 
हा….हा ……हा …हा … :-))
जस्ट चिल सारु। ……। सेन्टी कहीं की :-))

“इस दिल की जिद्द हो तुम वरना 
इन आँखों ने हसीन बहुत देखे हैं :-))” 

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