बेगाना….

दूरियाँ जो तुम बढ़ाने लगे हम फिर से खुद को पाने लगे !!

एक पल भी ना लगा छोड़कर जाने में,पास आने में तो बरसों लगे !!

पल जो बिताये थे साथ में.आज वो गुजरे जमाने लगे !!

दिल टूटने पर भी प्यार बार-बार होना,फिर से जीने के ये बहाने लगे !!

तोड़ते रहे जो बार-बार मेरा दिल,आज मूझे वो लोग पुराने लगे !!

मुद्दतों दिल में बसाया जिसे ,आज वो ही सबसे बेगाना लगा !!

Advertisements

कल रात-:)

कल रात बैठकर मैंने एक अफ़साना लिखा

तेरे साथ बिताया हर अपना-बेगाना पल लिखा !!

रात भर तन्हायी से की बातें

कुछ सौगातें उसको दी ,कुछ ली हैं !!

खुद के पास बैठे जब, खुद से बातें की

परत दर परत खुलते ही गए राज कई !!

तुम थे मेरे था मुझको भरम फिर भी

इस बेवफ़ाई को तुम्हारी मज़बूरी लिखा !!

जो अल्फाज़ जोड़ते हैं, तोड़ भी देते हैं

फसाना बनने को जिंदगी ने शाम से रातें की हैं !!

जब उस खुदा ने कलम दी मुझे तो

तेरे लिये सारा जहाँ  और मेरे हिस्से में वीराना लिखा मैंने !!

बहता दरिया एक शायर….

एक अधूरा अरमान हू मैं

                                    इतनी भीड़ में भी तन्हा हू मैं !

पूछो ना मेरे अतीत के बारे में

                                        लिपटा सामान हू मैं !!

रहे हैं वफ़ा में मेरे

                         नक़्शे कदम सलामत !

फिर क्यों कहते हो

                           कि नादान हू मैं !!

साथ अगर जबान देती

                                 तो मैं बताता !

गम के सायों में

                       छुपी मुस्कान हू मैं !!

किस हवा से उजड़ा

                            मेरा आशियाँ !

जबकि खुद एक

                       तूफान हू मैं !!

क्यों जलाते हो

                      मुझे मुर्दा समझकर !

सुनो आखिर

                   जिन्दा इंसान हू मैं !!

मैं तो बहता दरिया हू

                              समुंद्र में उतर जाऊगा !

कौन मिटा सकता हैं भला मुझे

                                  मैं तो शायर हू किताबों में उतर जाऊगा !!

खास यू होता,हर शाम साथ तू होता :-))

जिंदगी का सबसे मुश्किल वक़्त हम अकेले अनजानी सी राहों पर
ना मंजिल का पता ना राहों की खबर :-))
अजनबी शहर में अकेले तन्हा ,बेवजह वक़्त की फिक्र
अपनों से दूर रहने का गम :-((
एक अनजान सा शहर अनजाने से लोग
बेशक वक़्त के साथ-साथ वहाँ के लोगों के चेहरे भी थोड़े
जाने-पहचाने से लगने लग ही जाते हैं :-))
तंग गलियाँ बेपनाह भीड़
जिसमे दूर-दूर तक ना कोई अपना नजर आये
“तब दिल कह उठता है खास –
इस भीड़ में कोई अपना भी होता 
गर पर लड़खड़ाते तो उसकी बाँहें थाम लेते :-))”
इस भीड़ से दूर जाने के लिये थोड़ा उसके साथ ठहरते 
किसी की आँखों में खोने के लिये 
थोड़ा जिंदगी की खुशियों का गणित मिलाते ;-))



कभी अकेले बैठकर सोचती हू खास कोई ऐसा अपना होता 
जिसके साथ कुछ देर बैठते ,बिना कहे वो सब-कुछ सून लेता 
जिसके साथ हम अपने दिल में दबे सारे राज खोल देते 

जिसके महज होने भर से अपनी दुनिया बदल जाती :-))
“आई मीन कभी-कभार भावनाओं को शब्द देना मुश्किल हो जाता हैं :-))”
ऊफ्फ आज फिर से वो बात याद आ गयी तुम्हें भी याद हैं ना ?????
कि –
शब्दों में क्या रखा हैं ,भावनाओं को समझो 
हा….हा ……हा …हा … :-))
जस्ट चिल सारु। ……। सेन्टी कहीं की :-))

“इस दिल की जिद्द हो तुम वरना 
इन आँखों ने हसीन बहुत देखे हैं :-))”